माकूम क्षेत्र की सबसे वरिष्ठ नागरिक और प्रतिष्ठित समाजसेविका पुष्पबाला राजखोवा का 102 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे माकूम के ज्योतिनगर निवासी स्वर्गीय मौजादार सुरेन राजखोवा की धर्मपत्नी थीं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुष्पबाला राजखोवा ने मंगलवार, 28 अप्रैल की शाम करीब 5:00 बजे अपने निजी निवास पर अंतिम सांस ली।
वर्ष 1924 में जन्मी पुष्पबाला राजखोवा अपने युवाकाल से ही विभिन्न सामाजिक कार्यों में सक्रिय रही थीं। वे माकूम दुर्गा पूजा समिति जैसे कई प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़ी रही थीं। समाज के प्रति उनके समर्पण का उदाहरण इस बात से मिलता है कि उन्होंने माकूम लोअर प्राइमरी (निम्न बुनियादी) स्कूल में लंबे समय तक बिना किसी वेतन के शिक्षिका के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं।
उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। वे अपने पीछे तीन पुत्र—स्वपन राजखोवा, चंदन राजखोवा, नयन राजखोवा—और एक पुत्री टुलटुल खाउंड सहित बहू, दामाद, पोते-पोतियों और परपोतों से भरा एक विशाल परिवार छोड़ गई हैं।
आज माकूम के ज्योतिनगर स्थित सार्वजनिक श्मशान घाट पर पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। इस दौरान क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।



