असम की माटी के मूल निवासी मोरान समुदाय की अनूठी संस्कृति और परंपराओं की झलक एक बार फिर तिनसुकिया जिले में देखने को मिली। काकपाथार के ऐतिहासिक ‘गछतल बिहू’ (पेड़ के नीचे मनाया जाने वाला बिहू) के आयोजन से पूरा क्षेत्र उत्सव के माहौल में सराबोर हो गया। मोरान ढोल की थाप और बिहू गीतों की गूंज के बीच मोरान युवतियों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में मंत्रमुग्ध कर देने वाला नृत्य प्रस्तुत किया।
उल्लेखनीय है कि असम की सांस्कृतिक विविधता में काकपाथार के गछतल बिहू की एक विशिष्ट पहचान है। राज्य के प्राचीनतम स्वदेशी समुदायों में से एक, मोरान समुदाय सदियों से अपनी भाषा, कला और धार्मिक परंपराओं को संजोए हुए है। गछतल बिहू इसी समृद्ध विरासत का एक अभिन्न अंग है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
पिछले वर्षों की गौरवशाली परंपरा को बरकरार रखते हुए, इस वर्ष भी काकपाथार के लाजुमपधार सार्वजनिक खेल मैदान में इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहाँ का मनोरम वातावरण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आगंतुकों का मन मोह लिया। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि मोरान समुदाय की अपनी जड़ों से जुड़े रहने और भावी पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचित कराने का एक सशक्त माध्यम भी है।



