असम के होजई जिले के लंका साप्ताहिक बाजार में हर मंगलवार को आर्थिक स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर देखने को मिलती है। कार्बी पहाड़ की तलहटी में रहने वाली कार्बी समुदाय की महिलाएं हर मंगलवार को तड़के सुबह ही अपने हाथों से उगाई गई ताजी, जैविक और रसायन मुक्त सब्जियां लेकर इस व्यस्त बाजार में पहुंच जाती हैं।
सुबह करीब 6:00 बजे से शुरू होने वाले इस बाजार में इन महिलाओं की दुकानों पर ताज़ा कचु साग (अरबी के पत्ते), ढेकिया (फर्न), बांस के अंकुर (बैंबू शूट), ओतेंगा (हाथी सेब), कटहल समेत कई तरह की पारंपरिक स्थानीय सब्जियां और मौसमी फल बड़ी मात्रा में उपलब्ध रहते हैं। दूर-दूर से आने वाले ग्राहक इन बिना खाद वाली पौष्टिक और जैविक सब्जियों को खरीदने में काफी दिलचस्पी दिखाते हैं।
इस बाजार से होने वाली आमदनी इन ग्रामीण परिवारों के भरण-पोषण का एक बड़ा जरिया बन चुकी है। बाजार में आई एक कार्बी महिला ने बताया कि यहां से होने वाली कमाई से उन्हें अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घर का दैनिक खर्च चलाने में बहुत बड़ी मदद मिलती है।
विशेष बात यह है कि ये महिलाएं केवल व्यापार नहीं कर रही हैं, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी संजोए हुए हैं। बाजार में अपनी पारंपरिक कार्बी पोशाक (पिनी-पेकॉक) पहनकर आने वाली ये महिलाएं ग्राहकों के बीच अपनी सांस्कृतिक पहचान को गर्व से प्रदर्शित करती हैं। लंका जैसे व्यस्त शहर में इन आत्मनिर्भर कार्बी महिलाओं का यह छोटा सा प्रयास समाज में महिला सशक्तिकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की एक बड़ी प्रेरणा बन गया है।
बाइट: स्थानीय खरीदार और कार्बी महिला उद्यमी



