असम के डिब्रागढ़ स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हत्या के मामलों में दोषी पाए गए 5 अपराधियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, हत्या के प्रयास के एक मामले में अन्य अभियुक्त को 4 साल के सश्रम कारावास की सजा दी गई है। जिला अदालत के इतिहास में यह पहला मौका है जब एक साथ पांच दोषियों को उम्रकैद और एक को 4 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।
अदालत द्वारा जिन दोषियों को सजा सुनाई गई है, उनमें डिब्रागढ़ सदर थाने में तैनात पुलिस कांस्टेबल विकी चेतिया शामिल है, जिसने सर्विस कार्बाइन से अपनी गर्भवती पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस की चार्जशीट के आधार पर कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं, सुकराम मुड़ा को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास के साथ 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा, डिब्रागढ़ के बैरागीमठ में किराए के मकान के मालिक और उनकी पत्नी की हत्या करने वाले राजीव चुंकांग को कोर्ट ने उम्रकैद के साथ 50,000 रुपये जुर्माने की सजा दी है।
अन्य मामलों में, राजू चेतिया को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 10,000 रुपये के आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अपने रिश्तेदार की नृशंस हत्या के आरोपी दिपु मेछ को भी पुलिस की चार्जशीट के आधार पर अदालत ने दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, हत्या के प्रयास (अटेंप्ट टू मर्डर) के आरोपी पुतुल गढ़ को कोर्ट ने 4 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
इस पूरे कानूनी मामले में सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील चिन्मयी दत्ता और निलोत्पल फुकन ने अदालत में प्रभावी ढंग से दलीलें पेश कीं, जिसके आधार पर कोर्ट ने दोषियों को कड़ी सजा सुनाई।



