असम के तिनसुकिया रेल संभाग के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक माकुम जंक्शन रेलवे स्टेशन का नाम बदलने को लेकर क्षेत्र में तीव्र प्रतिक्रिया देखी जा रही है। तिनसुकिया रेल संभाग की कथित लापरवाही के कारण स्टेशन के नाम से ‘जंक्शन’ शब्द हटाकर इसे केवल ‘माकुम’ के रूप में नामांकित किया गया है, जिसके चलते स्थानीय निवासियों और संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टि से माकुम जंक्शन अत्यंत महत्वपूर्ण स्टेशन है। यह तिनसुकिया से एक ओर डांगरी और दूसरी ओर लेडो को जोड़ने वाला मुख्य जंक्शन स्थल है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 16 जुलाई 1883 को स्थापित यह रेलवे स्टेशन अपने समृद्ध इतिहास के लिए जाना जाता है और वर्तमान में यह तिनसुकिया रेल संभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है।
वर्तमान में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत माकुम रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण का कार्य चल रहा है। इस सौंदर्यीकरण प्रक्रिया के दौरान, स्टेशन पर लगाए गए नए नाम पट्टों (साइनबोर्ड) पर ‘माकुम जंक्शन’ के स्थान पर केवल ‘माकुम’ अंकित किया गया है। ऐतिहासिक पहचान के साथ इस तरह की छेड़छाड़ को लेकर स्थानीय जनता ने रेल विभाग के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जंक्शन शब्द का हटना न केवल इस स्टेशन के गौरवशाली इतिहास का अपमान है, बल्कि यह रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की बड़ी चूक को भी दर्शाता है। इस मुद्दे को लेकर माकुम में विरोध प्रदर्शन और तीव्र प्रतिक्रिया का सिलसिला जारी है।



