असम के डिगबोई के रहने वाले योगेन पाटोवारी ने अपनी शारीरिक दिव्यांगता को आड़े न आने देते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। योगेन आगामी 21 सितंबर से जापान में आयोजित होने वाली ‘विश्व पंजा कुश्ती (आर्म रेसलिंग) प्रतियोगिता’ के मास्टर्स वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय पंजा कुश्ती प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 स्वर्ण और 1 कांस्य पदक अपने नाम किया है।
योगेन पाटोवारी की यह सफलता उनके कड़े संघर्ष और अदम्य साहस की कहानी है। साल 2008 में एक भीषण सड़क दुर्घटना में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद उनके घुटने और गर्दन में लोहे की रॉड (प्लेट) लगानी पड़ी थी। इस गंभीर शारीरिक चुनौती के बावजूद, उन्होंने अपने कड़े परिश्रम और मजबूत आत्मबल के दम पर खेल की दुनिया में अपनी सफलता का सफर जारी रखा है।
“इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता के बावजूद, राज्य सरकार की ओर से योगेन पाटोवारी को अब तक कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली है, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।” — डिगबोई क्षेत्रीय ताई अहोम युवा परिषद
योगेन की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद भी राज्य सरकार की ओर से कोई आर्थिक मदद न मिलने पर ‘डिगबोई क्षेत्रीय ताई अहोम युवा परिषद’ ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। संगठन ने असम सरकार के खेल विभाग से मांग की है कि विश्व पटल पर राज्य और देश का नाम रोशन करने जा रहे खिलाड़ी योगेन पाटोवारी को जल्द से जल्द वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।



