
असम की पहचान और अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली चाय संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से महिला महाविद्यालय परिसर में एक दिवसीय ‘चाय उत्सव’ का भव्य आयोजन किया गया। भारतीय चाय बोर्ड के तिनसुकिया क्षेत्रीय कार्यालय और तिनसुकिया महिला महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला।

प्रतियोगिताओं में दिखा परंपरा और नवाचार का संगमदिनभर चले इस आयोजन में चाय को केंद्र में रखकर कई तरह की रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कॉलेज की छात्राओं के बीच आयोजित ‘टी-मेकिंग प्रतियोगिता’ में पारंपरिक कड़क चाय के अलावा आधुनिक फ्लेवर्ड और हर्बल चाय के बेहतरीन प्रयोग देखने को मिले।इसके साथ ही, डिजिटल युग की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए युवाओं के लिए ‘टी-रील मेकिंग’ और असम के चाय बग़ीचों की संस्कृति को कैनवास पर उतारने के लिए ‘चित्रकला प्रतियोगिता’ का भी आयोजन हुआ। हर प्रतियोगिता में युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।अधिकारियों की अथक मेहनत लाई रंगइस आयोजन को ऐतिहासिक सफलता दिलाने में भारतीय चाय बोर्ड, तिनसुकिया के अधिकारियों और विमेंस कॉलेज प्रबंधन की भूमिका सराहनीय रही।

चाय बोर्ड के सहायक निदेशक दिब्यज्योति दत्ता, विकास अधिकारी नवज्योति बोरो, विश्वजीत गोगोई सहित पूरी टीम ने कई दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इस कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की थी। कॉलेज प्रशासन के सक्रिय सहयोग और तालमेल के चलते यह आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हुआ।चाय को सिर्फ़ पेय नहीं, बनाएं करियर का ज़रियाकार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को यह समझाना था कि चाय केवल सुबह-शाम का पारंपरिक पेय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक विशाल बाज़ार और संभावनाओं से भरा क्षेत्र है। आयोजकों ने कहा कि युवा इस क्षेत्र में नए स्टार्टअप, आधुनिक पैकेजिंग, एग्री-बिजनेस और डिजिटल मार्केटिंग के ज़रिए बेहतर करियर और रोज़गार के अवसर तलाश सकते हैं। प्रतियोगिताओं में युवाओं की भारी भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि सही मंच मिलने पर नई पीढ़ी अपनी जड़ों और परंपरा से जुड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।




