Friday, April 17, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

मार्घेरिटा के पर्यटन विकास के लिए जागरूक नागरिकों ने उठाई आवाज, ‘मिनी इंडिया’ को उपेक्षा से बचाने की मांग

तिनसुकिया जिले के अंतर्गत आने वाला 83 नंबर मार्घेरिटा विधानसभा क्षेत्र असम के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में से एक माना जाता है। अपनी समृद्ध संस्कृति, विरासत, विभिन्न जातीय समूहों, खनिज पदार्थों और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण इसे कई लोग ‘मिनी इंडिया’ कहकर भी पुकारते हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि राज्य सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों की कथित उदासीनता के कारण यह ऐतिहासिक क्षेत्र पर्यटन के मानचित्र पर अपनी सही जगह नहीं बना सका है।

मार्घेरिटा के प्रमुख समाजसेवी देवजीत बरुआ ने इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड के अधीन आने वाली टिपोंग कोलियरी अपनी ऊंची पहाड़ियों और प्राकृतिक सुंदरता के कारण ‘मिनी दार्जिलिंग’ जैसी दिखती है। इसके अलावा, एशिया की पहली लकड़ी चीरने वाली मिल (A’R & T Company), सदियों पुराने बौद्ध विहार, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान निर्मित ऐतिहासिक स्टिलवेल रोड और लेडो एयरस्ट्रिप जैसी धरोहरें यहाँ मौजूद हैं।

उल्लेखनीय है कि इसी क्षेत्र के लेडो बिछा गांव में रॉबर्ट ब्रूस और सी.ए. ब्रूस ने असम में पहली बार चाय की खोज की थी। जागरूक नागरिकों का मानना है कि यदि इन ऐतिहासिक स्थलों और जातीय संस्कृतियों के अध्ययन के लिए केंद्रों का निर्माण किया जाए, तो मार्घेरिटा एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। इससे न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने मार्घेरिटा के निवासी और वर्तमान केंद्रीय विदेश एवं कपड़ा राज्य मंत्री पवित्र मार्घेरिटा से इस दिशा में हस्तक्षेप करने की अपील की है। लोगों ने मांग की है कि वह संसद में मार्घेरिटा के पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए आवाज उठाएं और इस ऐतिहासिक क्षेत्र को पर्यटन के विश्व मानचित्र पर स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles