आगामी मानसून के मौसम और क्षेत्र में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या को देखते हुए, भारतीय सेना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) ने संयुक्त रूप से ‘अभ्यास जल रक्षा’ (Exercise Jal Raksha) का आयोजन किया। स्पीयर कॉर्प्स के तहत रेड शील्ड गनर्स द्वारा 16 और 17 मार्च को आयोजित इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान तैयारियों को मजबूत करना और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना था।
कार्यक्रम के पहले चरण में भारतीय सेना ने बाढ़ बचाव कॉलम के गठन, भूमिका और परिचालन क्षमताओं के बारे में जानकारी दी। इस दौरान विभिन्न अत्याधुनिक बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। वहीं, NDRF के प्रतिनिधियों ने बाढ़ प्रतिक्रिया टीमों के संगठन और कार्यप्रणाली का विवरण साझा किया। प्रतिभागियों को आपदा के समय अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं को गहराई से समझाने के लिए व्यावहारिक प्रदर्शन भी किए गए।
अभ्यास के दूसरे दिन रूपाई और तेंगापानी घाट पर गहन गतिविधियां संचालित की गईं। इसमें जमीन और ड्रोन के माध्यम से हवाई सर्वेक्षण, संयुक्त कमांड पोस्ट की स्थापना और कृत्रिम बाढ़ की स्थिति बनाकर बचाव अभियान का अभ्यास किया गया। NDRF के कर्मियों ने नाव पलटने जैसी आपात स्थितियों में लोगों को सुरक्षित निकालने की तकनीक दिखाई, जबकि सेना की मेडिकल टीम ने प्राथमिक उपचार और आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्रदान करने के तरीकों का प्रदर्शन किया।
इस विशेष आपदा प्रबंधन अभ्यास में एनसीसी (NCC) कैडेटों और स्थानीय नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से देखा कि कैसे भारतीय सेना और NDRF प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समन्वय के साथ जीवन बचाने का कार्य करते हैं। इस तरह के संयुक्त अभ्यासों से न केवल कार्यक्षमता बढ़ती है, बल्कि संकट के समय त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।



